
हरिद्वार। आज श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में संस्कृत भारती तथा महाविद्यालय के संयुक्त तत्त्वाधान में संस्कृत सप्ताह का शुभारम्भ किया गया। शुभारम्भ कार्यक्रम में उपस्थित समस्त विद्वज्जनों ने संस्कृतभाषा के संवर्धन तथा संस्कृत भाषा को जन सामान्य तक कैसे पहुचाएँ? इस विषय पर अपने विचार रखें।
राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध संस्कृत व्यङ्य कवि डॉ. प्रशस्यमित्र शास्त्री ने बताया कि संस्कृत भाषा दिव्य गुण सम्पन्न है । विभिन्न भाषाओं में देव स्तुति एवं संपूर्ण देवकार्य संस्कृत में ही होते हैं । देवताओं के आह्वाहन के लिए संस्कृत का ही प्रयोग होता है। इसीलिए इसे देवावाणी, अमरगिरा, सुरभारती, गीर्वाणी आदि शब्दों से अलंकृत किया जाता है ।
महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य श्री बी.के. सिंहदेव ने बताया कि संस्कृत लिपि वैज्ञानिक है । इसकी वर्णमाला वैज्ञानिकों के लिये आज भी पथ प्रदर्शक बनी हुई है। संस्कृत व्याकरण विज्ञान की जड़ मानी जाती है। इस प्रकार सभी गुण संस्कृत की दिव्यता में प्रस्फुटित होते हैं। संस्कृत का सौन्दर्य अवर्णनीय है। विश्व की अनेक भाषाओं के कलाकार संस्कृत भाषा के सामने नतमस्तक हैं।
संस्कृत भारती के प्रान्त सङ्घठन मन्त्री श्री गौरव शास्त्री जी ने कहा कि इस संस्कृत सप्ताह का उद्देश्य संस्कृत भाषा को जनसामान्य के लिये सुलभ बनाना है। संस्कृत भाषा में ऋषियों का योगदान अन्यतम है। मन्त्रद्रष्टा ऋषियों ने कायिक, वाचिक और मानसिक शुद्धि के साथ तपोबल से समाधिस्थ होकर वेदों का साक्षात्कार किया है। भारतवर्ष की पुण्यमयी वसुधा पर हीं वेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद्, वेदांग, षड्दर्शन, स्मृति, धर्मशास्त्र, पुराण, रामायण, महाभारत, आयुर्वेद, नीतिशास्त्र, आचारशास्त्र, कामशास्त्र तथा काव्यादि समस्त ग्रन्थ प्रारम्भ में संस्कृत भाषा में हीं लिखे गए।
इस अवसर पर डॉ. निरञ्जन मिश्र, डॉ. मञ्जु पटेल, डॉ. रवीन्द्र कुमार, डॉ. आशिमा श्रवण, डॉ. आलोक कुमार सेमवाल, डॉ. दीपक कुमार कोठरी, श्री विवेक शुक्ला, श्री मनोज कुमार गिरि, डॉ. प्रमेश कुमार बिजल्वाण तथा महाविद्यालय के अन्य कर्मचारी उपस्थित रहें।