
ऐतिहासिक नगर हैदराबाद में सन् 1968 में आर्य महासम्मेलन का विशाल आयोजन महात्मा आनन्द स्वामी जी की अध्यक्षता में हुआ था। उस सम्मेलन में कुछ धनराशि बच गई थी जिसका सदुपयोग करते हुए हैदराबाद मलकपेट क्षेत्र में उपदेशक महाविद्यालय की स्थापना की गई। इस महाविद्यालय की स्थापना स्वयं महात्मा आनन्द स्वामी जी ने की था। महाविद्यालय में दीर्घकाल तक तेलगू भाषा के प्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य गोपदेव शास्त्री जी ने उपदेशक महाविद्यालय का संचालन किया और यहाँ से तेलगू भाषा में वैदिक साहित्य का अनुवाद करके उसे प्रकाशित भी कराया और वैदिक सिद्धान्तों के प्रचार-प्रसार में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई किन्तु आचार्य गोपदेश शास्त्री जी के निधन के पश्चात् उपदेशक महाविद्यालय बन्द हो गया।
इस उपदेशक विद्यालय को प्रसिद्ध दानवीर श्री सुधाकर गुप्ता की अध्यक्षता में गठित दयानन्द भवन समिति ने सुरक्षित रखा और आर्य प्रतिनिधि सभा तेलगाना आन्ध्रप्रदेश के प्रधान तथा सार्वदेशिक सभा के मंत्री प्रो. विलराम आर्य जी की प्रेरणा से पुनः वेद पाठशाला (गुरुकुल) प्रारम्भ करने का निश्चय किया। श्री सुधाकर गुप्ता जी और प्रो. विट्ठलराव आर्य जी ने इस कार्य के लिए कई गुरुकुलों के संचालक, वेदार्ष गुरुकुल महाविद्यालय, गौतमनगर, नई दिल्ली के आचार्य एवं श्रीमदयानन्द वैदिक गुरुकुल परिषद् के अध्यक्ष स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती तथा सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश जी से विचार-विमर्श करने के पश्चात् दयानन्द भवन समिति की कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर समिति के समस्त सदस्यगणो ने निर्णय किया कि उपदेशक महाविद्यालय के भवन में वेद पाठशाला गुरुकुल प्रारम्भ करने के लिए समिति ने भवन वेदार्ष गुरुकुल महाविद्यालय न्यास को सौंपने का निश्चय किया और वहाँ तन-मन-धन से सहयोग भी देने का वचन दिया। इस निश्चय के पश्चात् गुरुकुल के आचार्य एवं श्रीमदयानन्द गुरुकुल परिषद् के महामंत्री धनंजय ने हैदराबाद जाकर सारी स्थिति का आंकलन किया और गुरुकुल प्रारम्भ करने के लिये कार्यान्वयन समिति एवं प्रो. विट्ठल राव आर्य जी के साथ मिलकर सम्पन्न किया और स्वामी प्रणवानन्द जी सरस्वती की आज्ञा से निश्चय किया कि नये गुरुकुल का शुभारम्भ भारतीय नववर्ष से किया जायेगा उसी के अनुरूप गत 23 अप्रैल, 2022 को गुरुकुल शुभारम्भ समारोह एवं नववर्ष (उगादी पर्व) का भव्य आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न भागों से वैदिक विद्वान् एवं सहयोगीजन सम्मिलित हुए आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र हरियाणा, दिल्ली उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं उडीसा आदि प्रान्तों से अनेक संन्यासी विद्वान, विदुषी आचार्या, उपदेशक एवं भजनोपदेशक आदि पधारे।
कार्यक्रम से एक मास पूर्व चतुर्वेद पारायण महायज्ञ का अनुष्ठान प्रारम्भ किया गया जिसकी पूर्णाहुति 3 अप्रैल, 2022 को थी। इस यज्ञ के ब्रह्मपद को प्रसिद्ध वैदिक विद्वान् अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त धर्मपाल शास्त्री काशीपुर ने सुशोभित किया।
2 अप्रैल 2022 को यज्ञ के उपरान्त समारोह का विधिवत उद्घाटन सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश जी ने ध्वजारोहण के द्वारा किया। तत्पश्चात् गुरुकुल शुभारम्भ समारोह विधिवत रूप से प्रारम्भ हुआ जिसमें सर्वप्रथम गुरुकुल में जिन ब्रह्मचारियों को प्रथम प्रवेश दिया गया उन्हें स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती की अध्यक्षता में मंच पर आशीर्वादयुक्त बैठाया गया। आशीर्वाद के उपरान्त सभी उपस्थित संन्यासियों एवं विद्वानों के साथ स्वामी प्रणवानन्द जी ने सभी ब्रह्मचारियों को गुरुकुल में प्रविष्ट करके उन्हें अपना आशीर्वाद दिया। उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि एवं गगनभेदी नारों से ब्रह्मचारियों का स्वागत किया।
गुरुकुल शुभारम्भ समारोह में वीतराग संन्यासी स्वामी चित्तेश्वरानन्द जी महाराज, गुरुकुल बडलूर के आचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द जी, सार्वदेशिक सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश जी, सार्वदेशिक सभा के मंत्री प्रो. विट्ठलराव आर्य जी, युवा संन्यासी स्वामी आदित्यवेश जी एवं विद्वान् संन्यासी स्वामी श्रद्धानन्द जी के अतिरिक्त डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ( पूर्व सचिव संस्कृत अकादमी दिल्ली एवं प्रोफेसर गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार), पं. धर्मपाल शास्त्री, डॉ. दीनदयाल वेदालंकार (गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार), आचार्य यज्ञवीर शास्त्री गुरुकुल पौंधा, आचार्य योगेन्द्र याज्ञिक (गुरुकुल होशंगाबाद), आचार्य नरेन्द्र (वेद गुरुकुलम् हैदराबाद), आचार्य उदयन मीमांसक (गुरुकुल निगमनीडम् हैदराबाद), आचार्या सुनीति, आचार्य रामपाल शास्त्री (मानव सेवा प्रतिष्ठान), आचार्य वेदाकर (हैदराबाद), आचार्य चन्द्रभूषण (देहरादून), आचार्या शारदा (कन्या गुरुकुल उड़ीसा), डॉ. धारणा याज्ञिकी (कन्या गुरुकुल प्रहलादपुर, सोरों, उ. प्र.) आदि ने सम्बोधित किया। पं. नरेशदत्त आर्य एवं श्री अशोक आर्य (ग्वालियर) ने भजनों के माध्यम से अपने विचार रखे। इस पूरे कार्यक्रम का कुशल संयोजक गुरुकुल पौंधा के आचार्य डॉ. धनंजय एवं आर्य प्रतिनिधि सभा तेलंगाना+आन्ध्र प्रदेश के उपप्रधान पं. हरिकिशन वेदालंकार ने बड़ी कुशलता के साथ किया ।
दो दिवसीय गुरुकुल शुभारम्भ समारोह में आर्य प्रतिनिधि सभा तेलंगाना+आन्ध्र प्रदेश के मंत्री श्री रघु रामलू एडवोकेट, उपप्रधान श्री लक्ष्मण सिंह आर्य, श्री वत्स अशोक जायसवाल, दयानन्द भवन समिति के मंत्री श्री श्रीनिवास राव, वेद विद्यालय के व्यवस्थापक ब्र. एस. वेदमित्र, ब्र. जितेन्द्र पुरुषार्थी, महाशय सुल्तान सिंह आर्य (रोहतक), श्री अनन्त कुमार शास्त्री (उड़ीसा), श्री बलजीत सिंह सहरावत (दिल्ली), श्री सोमदेव शास्त्री ( गुरुकुल गौतमनगर), श्रीमती वसुधा शास्त्री एवं श्री अरविन्द कुमार शास्त्री, आचार्य रतनदेव शास्त्री (सोनीपत) आदि का विशेष सहयोग रहा। गुरुकुल पौंधा तथा गुरुकुल गौतमनगर से पधारे हुए ब्रह्मचारियों ने यज्ञ एवं भोजन आदि की व्यवस्था में श्रद्धा एवं निष्ठा के साथ अपना योगदान दिया।
इस अवसर पर स्वामी प्रणवानन्द सरस्वती जी, सभा प्रधान स्वामी आर्यवेश जी, मंत्री प्रो. विठ्ठलराव आर्य जी एवं श्री एम. सुधाकर गुप्ता की अपील पर उपस्थित आर्यजनों ने उत्साह के साथ दान देकर गुरुकुल के शुभारम्भ समारोह को और अधिक सम्बल प्रदान किया। श्री एम. सुधाकर गुप्ता ने अपने दयानन्द भवन समिति के समस्त पदाधिकारियों एवं सहयोगियों की ओर से इस अवसर पर घोषणा की कि वे गुरुकुल के संचालन में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने देंगे और यहाँ पर पढ़ने वाले ब्रह्मचारियों, पढ़ाने वाले आचार्यों एवं आगन्तुक अतिथियों तथा अभिभावकों के भोजन, आवास एवं अन्य सुविधाओं की पूरी व्यवस्था करेंगे। उपस्थित जन समूह ने उनके इस आश्वासन पर तालियाँ बजाकर जोर स्वागत किया। यह दो दिवसीय कार्यक्रम अत्यन्त उत्साह के वातावरण में सम्पन्न हुआ और 3 अप्रैल, 2022 को सायं 4 बजे शांति पाठ के बाद कार्यक्रम का समापन किया गया ।

